स्त्री विचारों एवं कर्म से पूर्णरूपेण शक्ति व सामर्थ्य का प्रतीक है – डॉ पिंकेशलता रघुवंशी

राष्ट्र सेविका समिति नगर विदिशा की बहनों ने शस्त्र पूजन कर निकाला पथ संचलन

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ विदिशा रमाकांत उपाध्याय/ 9893909059 

विचारों में दृढ़ता व व्यवहार में नम्रता ही शक्ति की सम्पन्नता का परिचायक है। स्त्री विचारों एवं कर्म से पूर्णरूपेण शक्ति व सामर्थ्य का प्रतीक है। यह बात कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं राष्ट्र सेविका समिति की विभाग कार्यवाहिका डॉ पिंकेश लता रघुवंशी ने पथ संचलन के अवसर पर कहीं। 


शस्त्र पूजन एवं विजया दशमी उत्सव कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुये नगर कार्यवाहिका सुपर्णा सिंह राजपूत ने बताया कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी राष्ट्र सेविका समिति द्वारा पथ संचलन आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के शुभारंभ में अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन किया गया तत्पश्चात ध्वजारोहण, प्रार्थना, सामुहिक गीत अर्शिता शर्मा, कार्यक्रम की भूमिका अतिथि परिचय जिला कार्यवाहिका रश्मि ताम्रकार द्वारा रखा गया।

अमृत वचन एवं डॉ राजश्री वैद्य के व्यक्तिगत गीत उपरांत मुख्य वक्ता के रुप में विदिशा विभाग कार्यवाहिका डॉ पिंकेश लता रघुवंशी ने अपने उद्वोधन में कहा कि संस्कृति की अस्मिता को बनाये रखने के लिए सही एवं गलत के भेद को जानना अत्यावश्यक है और इसके लिए हमें हमारी संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहना आवश्यक है। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सदैव मन एवं स्वभाव में रखकर संस्कृति को पोषित करना है। पथ संचलन समस्त समाज को समरस एवं संगठित करने का माध्यम है। समाज को संगठित करने का यही कार्य अनुशासित संगठन के बल पर सम्पूर्ण देश में राष्ट्र सेविका समिति द्वारा किया जा रहा है।

दीपोत्सव हो या अन्य त्यौहार हमें चाइना व अन्य विदेशी वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए और अपने स्वदेशी बंधु बांधवों के रोजगार को बढ़ावा देना चाहिए।वंदनीय मौसीजी लक्ष्मीबाई केलकर का जीवन संघर्ष एवं समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बाद भी विश्व का सबसे बड़ा स्त्री संगठन खड़ा कर दिया।यह तत्कालीन परिस्थितियों में अपने आप में पराक्रम था। वर्तमान समय में भी विश्व का सबसे बड़ा स्त्री संगठन होने के बाद भी समिति फेमिनिज्म की नहीं फेमिलीज्म की बात करती है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शासकीय नवीन कालेज की प्राध्यापक डॉ वनिता वाजपेयी ने स्त्री संगठन के महत्व स्त्री की सामर्थ्य व समाज व राष्ट्र जागरण का सेतु नारी ही होती है। राष्ट्र सेविका समिति जैसे अनुशासनात्मक संगठन की प्रशंसा करते हुये उसके और अधिक विस्तार की बात कही। 

उद्वोधन के पश्चात पथ संचलन निकला जो अग्रवाल धर्मशाला से आरंभ होकर गोल्डन स्टूडियो, पुराने शासकीय चिकित्सालय, नीमताल, कागदीपुरा, तिलक चौक, मुख्य बाजार , माधवगंज होते हुये वापिस अग्रवाल धर्मशाला में समाप्त हुआ।संचलन में शताधिक बहनें पूर्ण गणवेश में सम्मिलित हुई। घोष की धुन पर कदमताल करते हुए चल रही थी। पथ संचलन में भारत माता आकर्षक झांकी भी सजाई गई थी। पथ संचलन का जगह जगह पुष्प से स्वागत किया गया।