संस्कृत देव भाषा है और विज्ञान ने भी इसे मान लिया है : भदौरिया

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल@विदिशा रमाकांत उपाध्याय/

एसएटीआई के स्मार्ट सभागार में संस्कृत भारती मध्य भारत प्रांत का एक दिवसीय अभ्यास वर्ग आयोजित हुआ। जिसमें प्रांत भर से आए संस्कृत के विद्वानों ने अपने विचार रखे।

मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष डॉ. अशोक भदौरिया ने कहा कि जब तक संस्कृत भाषा घर-घर तक नहीं पहुंच जाती तब तक संस्कृति भी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत देव भाषा है और विज्ञान ने भी इसे मान लिया है। शिक्षा की नीति में संस्कृति को प्राथमिकता होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हमारा प्रयास है कि कम से कम प्रचार के माध्यम से ही यह देव भाषा स्थापित हो जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बड़े-बड़े जो संस्थान चल रहे हैं वहां पर संस्कृत के केंद्र भी खोले जाना चाहिए।

एसएटीआई के संचालक डॉ. जनार्दनसिंह चौहान ने कहा कि पिछले चार साल से संस्थान में संस्कृत विभाग का सेंटर है। यहां पर दो बेच में 60 छात्रों को संस्कृत की शिक्षा दी जा रही है। लेकिन अब संस्कृत के प्रचार-प्रसार की जरूरत है। लोगों को यह बताना होगा कि संस्कृत हमारी धरोहर है।

पत्रकार पंकज पाठक ने कहा कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया की अहम भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अभियान एक ऐसा अभियान है कि इसे प्रसारित करने में सभी सहयोग करना चाहेंगे। इस मौके पर पत्रकार मयंक चतुर्वेदी के अलावा संगठन मंत्री नीरज दीक्षित, मनोज शास्त्री,जयरामसिंह चौहान,राजेश व्यास आदि मौजूद रहे।