Ganjbasoda माता-पिता से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं : स्वामी डॉ. रामकमल दास वेदांती जी

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वेदांत आश्रम गंज बासौदा में समायोजित विराट सतचंडी महायज्ञ व श्री राम कथा के चतुर्थ दिवस में जगतगुरु अनंतानंद द्वाराचार्य स्वामी डॉ राम कमल दास वेदांती जी महाराज जी ने बताया कि राम नाम की अनंत महिमा है हम लोग प्रभु श्री राम को अयोध्या नरेश दशरथ तनय के रूप में ही जानते हैं, जबकि शास्त्रों में भगवान श्री राम को चार रूपों में बताया गया है एक रूप से वे दशरथ के बेटे और दूसरे रूप में ब्रह्मांड के प्रत्येक कण में रम रहे हैं तीसरा रूप भगवान श्री राम का सृष्टि कर्ता का है क्योंकि संपूर्ण ब्रह्मांड का सृजन भी भगवान राम ही करते हैं चतुर्थ रूप उनका सृष्टि से परे अनंत ब्रह्मांड नायक का माना गया है

श्री रामचरितमानस बालकांड में श्री राम कथा का शुभारंभ तीर्थराज प्रयाग की धरा पर महर्षि भारद्वाज तथा दीर्घजीवी ऋषि याज्ञवल्क्य के ज्ञानमय संवाद से शुरू किया गया है महर्षि भारद्वाज ने तत्ववेत्ता ऋषि याज्ञवल्क्य जी से बड़े संकोच के साथ पूछा है कि दशरथ तनय राम तथा पर ब्रह्म राम दोनों ही एक ही है अथवा अलग-अलग इस संदर्भ में महर्षि याज्ञवल्क्य जी जी ने श्री राम के व्यापक ऐश्वर्यमय रूप का वर्णन करने के लिए भगवान शिव के चरित का शुभारंभ किया है वें इन्हीं भगवान श्री राम की कथा श्रवण करने के लिए भगवती सती के साथ ऋषि अगस्त के आश्रम में चलकर जाते हैं।

स्वामी श्री वेदांती जी ने कहा कि कथा श्रवण के साथ साथ हमें कथा में बताए गए सद्गुणों को भी अपने जीवन में उतारना चाहिए जिन आचरण से मात पिता घर में दुखी हो उनके पूजन पाठ से भी कोई लाभ नहीं है क्योंकि हम जिन श्री राम की पूजा करते हैं वह भी अपने चरित्र में यही बताते हैं कि हम अपने से बड़ों का तथा माता-पिता का भाइयों का आदर जरूर करें जिन बच्चों का व नौजवानों का अपने माता-पिता में, भाई बहनों में, पत्नी और पुत्रों में स्नेह का संबंध नहीं होता वह परिवार बिखर जाते हैं उनकी संपत्ति उनके परिवार को नहीं संभाल सकती आचरण हीन लोगों के पास कितनी भी संपत्ति क्यों ना हो वह धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। आचरण वान लोगों के पास यदि संपत्ति कम भी हो तो भी उनके जीवन में खुशहाली और उत्साह बना रहता है।

विभिन्न आयोजनों से तीर्थमय हुआ वेदांत आश्रम

आज वेदांत आश्रम प्रांगण में विधिवत नौ देवियों का पूजन समर्चन व आराधन कर उनको स्थापित किया गया नौ देवियों के दिव्य झांकी का अवलोकन करने के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही कथा के उपरांत प्रसाद लेकर लोगों ने सौभाग्य का अनुभव किया कथा श्रवण करने के लिए बड़ी मात्रा में अयोध्या वृंदावन चित्रकूट व काशी के संतों का भी पदार्पण हो रहा है आश्रम के समस्त छात्र बटुक अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा के साथ साथ संपूर्ण वातावरण को वेदमय बना दे रहे हैं।