Rishikesh धनतेरस पूजन एवं यमदीप दान शंका समाधान व विधि- विधान : पंडित देव उपाध्याय

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ ऋषिकेश उत्तराखंड रमाकांत उपाध्याय / 9893909059

धनतेरस पूजन एवं यमदीपदान शंका समाधान एवं विधि
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इस वर्ष साधको मे भ्रम की स्थिति बन रही है की धन तेरस का त्यौहार कब मनाये। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 22 अक्टूबर शनिवार की शाम 06 बजकर 01 मिनट से तथा कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का समापन: 23 अक्टूबर शाम 06 बजकर 03 मिनट पर होगा। ऐसे मे धनतेरस की पूजा आज शाम करना ही श्रेष्ठ रहेगा क्योंकि धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन तथा यम के लिए दीपदान त्रयोदशी तिथि मे प्रदोष काल के समय किया जाता है जबकि खरीददारी आदि करने के लिए उदया तिथि की मान्यता है अतः आज 22 अक्टूबर की शाम धनतेरस का लक्ष्मी पूजन करें तथा खरीददारी कल 23 अक्टूबर के दिन करना ही शास्त्र सम्मत होगा।

धनतेरस 2022 पूजा का शुभ मुहूर्त
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आज शाम 07 बजकर 01 मिनट से रात 08 बजकर 57 मिनट तक रहेगा

वृषभ काल: आज शाम 07 बजकर 01 मिनट से रात 08 बजकर 55 मिनट तक
पंचांग के अनुसार, स्थिर लग्न पूजा के लिए आदर्श समय है। स्थिर लग्न यह दर्शाता है कि यदि आप इस मुहूर्त के दौरान पूजा करते हैं तो लक्ष्मी आपके पास दीर्घ काल तक स्थिर रहेगी। व्यापारिक समुदाय द्वारा इस पूजा को
बहुत सम्मान के साथ मनाया जाता हैं।

यम दीपदान विधि
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यमदीपदान विधि में नित्य पूजा की थाली में घिसा हुआ चंदन, पुष्प, हलदी, कुमकुम, अक्षत अर्थात अखंड चावल इत्यादि पूजा सामग्री होनी चाहिए। साथ ही आचमन के लिए ताम्रपात्र, पंच-पात्र, आचमनी ये वस्तुएं भी आवश्यक होती हैं। यमदीपदान करने के लिए हलदी मिलाकर गुंथे हुए गेहूं के आटे से बने विशेष दीप का उपयोग करते हैं ।

यमदीपदान प्रदोष काल में करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी का एक बड़ा दीपक लें और उसे स्वच्छ जल से धो लें। तदुपरान्त स्वच्छ रुई लेकर दो लम्बी बत्तियाँ बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियोँ के चार मुँह दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें।

प्रदोषकाल में इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली, अक्षत एवं पुष्प से पुजन करें। उसके पश्चात् घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी-सी खील अथवा गेहूँ से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है। दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए चारमुँह के दीपक को खील (लाजा) आदि की ढेरी के ऊपर रख दें।

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति ।।

अर्थात् त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों।

उक्त मन्त्र के उच्चारण के पश्चात् हाथ में पुष्प लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए यमदेव को दक्षिण दिशा में नमस्कार करें।
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