Tata group एक बार फिर से संभालेगा Air India की कमान

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ नई दिल्ली रविकांत उपाध्याय/

हजारों करोड़ों रुपए के कर्ज में जूझ रही एअर इंडिया को बेचने की सरकार की कोशिश आखिरकार कामयाब हो गई और इस एयरलाइन कंपनी को सालों बाद नया मालिक मिल ही गया। आश्चर्य की बात यह है कि जिस सख्स ने एयर इंडिया को 1932 में शुरू किया था आखिरकार अब फिर से बही ग्रुप इसका नया मालिक बन गया है। जी हाँ अब एअर इंडिया की कमान टाटा ग्रुप ही एक बार फिर से संभालेगा। टाटा ने एअर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ की बोली लगाई. इसी के साथ सबसे बड़ी बोली लगाकर टाटा ग्रुप एयर इंडिया को टेक ओवर कर लिया है।

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट यानी दीपम (Department of Investment and Public Asset Management- DIPAM) ने प्रेस काॅन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी है।

DIPM के सेक्रेटरी तुहीन कांत ने कहा कि Air India के लिए टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। Air India का 15300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा चुकाएगी. एअर इंडिया पर 31 अगस्त तक 61,560 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें 15300 करोड़ रुपए टाटा संस चुकाएगी जबकि बाकी के 46,262 करोड़ रुपए AIAHL (Air India asset holding company) भरेगी।

दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडेय बोलते हुए कहा कि एअर इंडिया स्पेसिफिक अल्टरनेटिव मैकेनिज्म (AISAM) पैनल ने एअर इंडिया की फाइनेंशियल बोली पर फैसला लिया है। इस पैनल में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई महत्वपूर्ण मंत्री और अधिकारी शामिल हैं।कई बार बोली के लिए आवेदन मांगे गए, लेकिन फाइनली सितंबर में दो बिडर के नाम फाइनल हुए। एअर इंडिया के सभी कर्मचारियों का ध्यान रखा जाएगा।

ज्ञात हो कि एअर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप (Tata Group) और स्पाइसजेट (SpiceJet) के अजय सिंह (ajay singh) ने बोली लगाई थी. हाल ही में ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में कहा था कि एअर इंडिया के लिए पैनल ने टाटा ग्रुप को चुन लिया है। बता दें कि जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस (Tata airlines) की स्थापना की थी। अब 68 साल बाद वापस एअर इंडिया को टाटा ग्रुप ने सबसे अधिक बोली लगाकर खरीद लिया है।

 टाटा ने शुरू की थी एअर इंडिया
एअर इंडिया को 1932 में टाटा ग्रुप ने ही शुरू किया था. टाटा समूह के जे.आर.डी. टाटा इसके फाउंडर थे। वे खुद पायलट थे। तब इसका नाम टाटा एअर सर्विस रखा गया। 1938 तक कंपनी ने अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर दी थीं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया। आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदी और टाटा से लेकर सरकार का स्वामित्व कर दिया था।