Bhopal केंद्रीय जेल में डॉ पंड्या ने किया गायत्री मंत्र लेखन स्थापना केंद्र का लोकार्पण

गायत्री मंत्र लेखन अभियान के तहत स्वर्गीय रमेशचंद्र खंडेलवाल की स्मृति में उनके परिजनों द्वारा पिछले ढाई साल में भोपाल केंद्रीय जेल के एक हजार बंदी भाई बहिनों को 24 हजार मंत्र लेखन पुस्तिकाओं दी गई , जिसमें ढाई साल में 1 करोड़ 26 लाख 72 हजार गायत्री मंत्र लेखन हुआ।

मनुष्य में देवत्व व धरती पर स्वर्ग के अवतरण की कामना और बंदियों की सोच को सकारात्मक और उन्हें संस्कारवान बनाना है, जिससे वे रिहा होने के बाद अच्छे काम कर सकें।

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ भोपाल मध्यप्रदेश रमाकांत उपाध्याय/ 9893909059 

अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में भोपाल के केंद्रीय जेल में आयोजित कार्यक्रम में देव संस्कृति विवि हरिद्वार के प्रति कुलपति और गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या और उनकी धर्मपत्नी शैफाली पंड्या द्वारा विचार क्रांति स्तंभ व गायत्री मंत्र लेखन पुस्तिकाओं के स्थापना केंद्र का लोकार्पण किया गया।

उन्होंने गायत्री परिवार के उद्देश्य बताकर विश्व कल्याण के लिए स्वयं की भागीदारी के लिए प्रेरित किया।  इस अवसर पर 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ भी हुआ जिसमें बंदी भाई बहिनों ने विश्व कल्याण की भावना से आहुतियाँ दीं। इस मौके पर बंदियों द्वारा भजन संगीत की प्रस्तुतियां दी गई।

यज्ञ के पूर्व बंदी भाई बहिनों द्वारा इन पुस्तिकाओं को अपने सिर पर रखकर शोभायात्रा भी परिसर में निकाली गई। उनके द्वारा एक बनेंगे, नेक बनेंगे, हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा, हम बदलेंगे, युग बदलेगा। जैसे नारे लगाए गए।

जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे ने बताया कि गायत्री परिवार के सहयोग से गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया।  मंत्र लेखन और यज्ञ का उद्देश्य बंदियों के सोच को सकारात्मक व उन्हें संस्कारवान बनाना है, जिससे वे रिहा होने के बाद अच्छे कार्य कर सकें।

जेल उप अधीक्षक पीडी श्रीवास्तव ने बताया कि पौधे लगाने व यज्ञ से पर्यावरण की शुद्धि होती है, इस बारे में भी बंदियों को जानकारी दी गई। इस अवसर पर पौधरोपण भी किया गया।

गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के रमेश नागर ने बताया कि जेल परिसर में होने वाले 24 कुंडीय यज्ञ के लिए तांबे और अन्य धातु से बने कुंड रखे  गए, जिनमें बंदियों समेत समूचे जनसमुदाय के कल्याण की भावना के साथ गायत्री मंत्रों से आहुतियां दी गई । ढाई साल पहले एक हजार से ज्यादा बंदियों को 24 हजार गायज्ञी मंत्र लेखन पुस्तिकाएं दी गई थीं। इन पुस्तिकाओं में 1 करोड़, 26 लाख, 72 हजार मंत्र लेखन किया जा चुका है। जिनकी स्थापना केंद्र का लोकापर्ण किया गया।