Ujjain सृष्टि के आरम्भ से ही उज्जयिनी का अस्तित्व – मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान

अवन्तिका तीन लोक से न्यारी, कितनी प्यारी है – मुख्यमंत्री श्री चौहान
उज्जैन के गौरव दिवस में शामिल हुए मुख्यमंत्री
संगीत निशा में प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलाश खेर ने बिखेरी स्वर-लहरियाँ

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ उज्जैन मध्यप्रदेश रविकांत उपाध्याय / 8085883358

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उज्जयिनी का जन्म उत्सव है। अवन्तिका नगरी तीन लोक से न्यारी, देखो कितनी प्यारी है। यहाँ का शुद्ध एवं सात्विक वातावरण सबका मन मोहता है। अदभुत दिन है आज गुड़ी पड़वा का, इस दिन विक्रम संवत का प्रारम्भ हुआ। आज विक्रम उत्सव भी हो रहा है। हमें यह याद रखना चाहिये कि हमारी संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है। विक्रम संवत ईस्वी सन से 57 वर्ष पुराना है। सनातन नया वर्ष आज प्रारम्भ हो रहा है और इसी दिन 2005 से हमने विक्रमोत्सव मनाना शुरू किया था। आज ही के दिन अवन्तिका का गौरव दिवस मनाया जा रहा है। इसी दिन सृष्टि की रचना हुई थी। सृष्टि को आरम्भ हुए एक अरब 95 करोड़ 58 लाख 85 हजार 123 वर्ष हो गये हैं। उज्जैन कालगणना की नगरी है। उज्जैन का गौरव सबको गौरवान्वित करता है। उज्जैन की अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है, जो युगों से पल्लवित होती रही है। सृष्टि के आरम्भ से ही उज्जयिनी का अस्तित्व माना जाता है। युग बदलते गये और उज्जैन को कभी उज्जयिनी, अवन्तिका, कनकश्रृंगा आदि नामों से जाना जाता रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सृष्टि के प्रत्येक कल्प में उज्जयिनी का अस्तित्व रहा है। स्कंद पुराण में उज्जयिनी के 6 कल्पों के 6 नाम दिए गए हैं, जो कल्पवार क्रमशः कनकश्रृंगा, कुशस्थली, अवंतिका, अमरावती, चूड़ामणि एवं पद्मावती है। इसलिए उज्जैन को प्रतिकल्पा भी कहा गया है। अन्य ग्रंथों में उज्जयिनी को भोगवती, हिरण्यवती, विशाला आदि नामों से भी संबोधित किया गया है।

शहर के सभी प्रतिष्ठानों के नाम हिन्दी में हों

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार भगवान शिव अवंतिका में महाकाल वन में अधिष्ठित हैं। उन्होंने कहा कि महाकाल वन प्रोजेक्ट में मन्दिरों की छटा को बढ़ाया जा रहा है। उज्जैन का सांस्कृतिक पुनरुत्थान होगा, विकास का नया इतिहास रचा जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमें एक नया संकल्प लेना पड़ेगा। शहर में जितने भी होटल बने हैं, सबके नाम अंग्रेजी में लिखे हैं। उन्होंने कहा कि मैं आग्रह करता हूँ कि सभी होटल्स के नाम हिन्दी में लिखे जाये। निज भाषा की उन्नति से ही हमारा शैक्षणिक विकास होगा। उज्जैन में मेडिकल कॉलेज आ रहा है। मेडिकल डिवाइस पार्क विक्रम उद्योगपुरी में आ रहा है। कर्नाटक एंटीबायोटिक उद्योग भी उज्जैन में लगाया जा रहा है। इससे अनेक लोगों को रोजगार मिलेगा। उज्जैन का औद्योगिक विकास भी होगा।

शहर से पूरी तरह मिटायें भिक्षावृत्ति

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज उज्जैन के गौरव दिवस पर आह्वान करता हूँ कि उज्जैन से भिक्षावृत्ति को पूरी तरह मिटा दिया जाये। बच्चों के नशे की आदत छुड़ाने के लिये उज्जैन जिले के कलेक्टर ने बहुत मेहनत की है। बच्चे भीख न मांगे, उनकी शिक्षा और भोजन की व्यवस्था की जाये। शहर में एक ऐसा केन्द्र बनाकर दें, जहाँ भण्डारा निरन्तर चलता रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में दो-चार स्थान पर आनन्दक केन्द्र बनाये जायें, जहाँ पर लोग अपनी अनुपयोगी वस्तुओं को देने और जरूरतमंद लोग सामग्री प्राप्त करने का आनंद ले सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब के बच्चों की पढ़ाई के लिये मैं एक संकल्प लेता हूँ। ऐसे बच्चों का प्रवेश शुल्क एवं सम्पूर्ण शिक्षा के लिये फीस मामा शिवराज भरेगा।

दबंग और दादा लोगों को मिला दूंगा मिट्टी में

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि दबंग और दादा को मिट्टी में मिलाकर रहेंगे। बेटियों की तरफ गलत निगाह उठाने वालों को भी जमींदोज कर दिया जायेगा। ऐसे लोगों पर बुलडोजर चलेगा। शिव का डमरू बजेगा और त्रिशूल उठेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा विनाश की जड़ है। चरस, हेरोईन जैसे नशे लोगों का जीवन तबाह करते हैं। हमें संकल्प लेना चाहिये कि हम नशामुक्त समाज बनायें।

नौका-विहार कर नागरिकों का किया अभिवादन

मुख्यमंत्री श्री चौहान, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव एवं विधायक पारस जैन ने शिप्रा नदी में नौका-विहार कर नागरिकों का अभिवादन किया। इसके बाद गायक कैलाश खेर के मंच पर जाकर “स्वामी देना साथ हमारा” गीत में सुर से सुर मिलाया।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का शासन भी विक्रमादित्य के यशस्वी शासन की तरह है। अभी एक माह पूर्व ही हमने दीपोत्सव मनाया था और आज विक्रमोत्सव और उज्जैन गौरव दिवस मना रहे हैं। यह मुख्यमंत्री के सहयोग के बिना संभव नहीं है। डॉ.यादव ने कहा कि आज विभिन्न पंचांगों का विमोचन किया गया। यह कार्य भी अदभुत है। डॉ.यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से ही शहर में औद्योगिकरण की नींव पड़ रही है। आज ही एक औद्योगिक इकाई का भूमि-पूजन किया गया है।

संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि हमें हमारे धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र को पहचानने की आवश्यकता है। हमारे प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री सेवा ही जीवन है, के संकल्प लेकर चल रहे हैं। इन्हीं के अनुरूप हमें कार्य करने की सीख लेना चाहिये। उन्होंने बताया कि विक्रमोत्सव में हुए कार्यक्रमों में विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति एवं परम्परा से उज्जैन निवासियों को अवगत कराने का प्रयास किया गया है। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जो कहा वह कर दिखाया। उज्जैन को धार्मिक नगरी के रूप में विश्व में ख्याति दिलवा दी है। विधायक श्री पारस जैन ने भी संबोधित किया।

पंचांगों का लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं अन्य अतिथियों द्वारा विक्रमादित्य के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर गौरव दिवस का शुभारम्भ किया गया। साथ ही विक्रम पंचांग, मेला पंचांग, विक्रम संवत पर आधारित तिथि पत्रक एवं विक्रम संवत पर आधारित कालगणना पंचांग का विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ‘विक्रम भारत’ शीर्षक से विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा प्रारम्भ किये गये यूट्यूब चैनल का लोकार्पण भी किया।

विभिन्न संस्थाओं ने लिया संकल्प

गौरव दिवस पर उज्जैन की विभिन्न संस्थाओं द्वारा जन-कल्याण के लिये संकल्प लिया गया। रामा दल अखाड़े की ओर से महन्त रामेश्वरदास द्वारा शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर एक लाख 25 हजार पौधे रोपने का संकल्प लिया। श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति की ओर से श्री प्रदीप गुरू द्वारा कोविड काल में अनाथ हुए बच्चों को दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह देने और उनके रहने, खाने एवं शिक्षा का प्रबंध करने का संकल्प लिया। उज्जयिनी सेवा समिति के श्री सुधीरभाई गोयल द्वारा जन-सहयोग से जिले के सभी कुपोषित बच्चों, एचआईवी से पीड़ित बच्चों एवं बाल भिक्षावृत्ति से पीड़ित बच्चों की सहायता करने और शिप्रा तट पर 11 हजार पौधे लगाने की बात कही।

संचालन विनय द्वारा किया गया। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, पद्मश्री गायक कैलाश खेर, पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया, तीर्थ-स्थान एवं मेला प्राधिकरण अध्यक्ष माखनसिंह सहित जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।