High court : 70 फीसदी फीस देने पर निजी स्कूलों को देना होगी TC

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @जबलपुर रमाकांत उपाध्याय/

 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने (Madhya Pradesh High Court) ने स्कूली बच्चों और अभिभावकों के हक में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब बच्चों के परिजन को 70% फीस (School Fee) जमा करने पर TC मांगने का हक होगा और संबंधित निजी स्कूल को टीसी (Transfer Certificate) जारी करना ही होगा।  इस फैसले के बाद स्टूडेंट्स (Students) को आगे की पढ़ाई और दूसरे स्कूल, कॉलेज में एडमिशन लेने में अड़चन खत्म हो जाएगी। अभी कोरोना के कारण आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते अभिभावकों द्वारा फीस नही भर पाने के कारण बच्चे नए स्कूल में एडमिशन नही ले पा रहे हैं उन्हें टीसी के लिए परेशान किया जा रहा था। 

प्रायवेट स्कूल मांगते थे पूरी फीस

ज्ञात हो कि अभी तक प्राइवेट स्कूल पूरी स्कूल फीस लेने के बाद ही बच्चे का TC जारी करते थे। किसी भी बच्चे की फीस बकाया होने पर स्कूल TC रोक कर दबाव बनाते थे। इस तरह के मामले को लेकर कई अभिभावक परेशान रहते थे। कई मामलों में बच्चों के भविष्य तक पर फर्क पड़ता था। मध्यप्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट के इस बड़े आदेश के बाद ऐसे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और बच्चों का एडमिशन होने से आगे की पढ़ाई में आसानी हो जाएगी।

एक सप्ताह में देना होगा TC

हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि निजी स्कूल TC देने में मनमानी करते हैं। इसपर सुनवाई में कोर्ट ने निजी स्कूलों को आदेश दिया कि वो पूरी फीस का दबाव ना बनाएं और 70% स्कूल फीस लेने के बाद एक हफ्ते में TC जारी करें, जिससे छात्र आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल या कॉलेज में एडमिशन ले सकें। हालांकि इस मामले में अगली सुनवाई 9 नवंबर को होनी है।

ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश बोर्ड के 10वीं का रिजल्ट आने के बाद प्राइवेट स्कूल फीस जमा करने का दबाव बनाते देखे गए थे, जिसके बाद जबलपुर के शहपुरा में रहने वाले दो पेरेंट्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि पूरी फीस नहीं देने के चलते स्कूल ने TC रोक रखा था और उनके बच्चों का दूसरे स्कूल में एडमिशन नहीं हो पा रहा था। मामले पर कहीं कोई सुनवाई नहीं होने पर अभिभावकों ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी।  कोर्ट के फैसले में एक अहम तर्क कोरोनाकाल के कारण माली हालात खराब होना भी था, जिसके बाद कोर्ट ने स्कूल संचालकों को लताड़ लगाई और पैरेंट्स के हक में फैसला सुनाया। मध्यप्रदेश हाइकोर्ट के इस फैसले से स्कूली बच्चों और अभिभावकों में हर्ष है।