Bhopal नवाचार के लिए म.प्र. पुलिस को प्रथम पुरस्कार, सीएम के निर्देश पर थानों का औचक निरीक्षण

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गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने किया सम्मानित – जेल एवं फॉरेंसिक विभाग को द्वितीय और प्रॉसीक्यूशन को तृतीय पुरस्कार

    अपराधों के रोकथाम में नवाचार के लिए म.प्र. पुलिस को प्रथम पुरस्कार

मुख्यमंत्री के निर्देश पर रातभर वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ किया थानों का औचक निरीक्षण

डीजीपी ने एक बजे औबेदुल्लागंज, ढाई बजे बिलखिरिया और चार बजे टीटी नगर थानों का किया निरीक्षण

सभी आईजी/डीआईजी/एसपी द्वारा रात 12 से 5 के बीच किया 125 से अधिक थानों का औचक निरीक्षण

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को रात्रि भ्रमण के लिये निर्देशों के पालन में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात डीजीपी से लेकर एसपी तक के सभी पुलिस अधिकारियों ने मध्य प्रदेश के थानों का एक साथ औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बीती रात पूरे प्रदेश में आईजी से लेकर एसपी तक के समस्त पुलिस अधिकारियों ने अपने कार्यक्षेत्र के सवा सौ से अधिक थानों का औचक निरीक्षण किया। डीजीपी रात एक बजे औबेदुल्लागंज, ढाई बजे बिलखिरिया और प्रात: चार बजे टीटी नगर थाने के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे । टीटी नगर थाने में डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना ने भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों की बैठक भी ली।

प्रदेश में शांति एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के दिए निर्देश

डीजीपी श्री सुधीर सक्सेना ने बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात औबेदुल्लागंज, बिलखिरिया और भोपाल के टीटी नगर थाने का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने थाना परिसर का गहनता से अवलोकन कर बड़ी संख्या में खड़े वाहनों को देखकर विधिसम्मत निराकरण के आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने थानों में लॉकअप, महिला सुरक्षा डेस्क तथा सीसीटीएनएस कार्य का निरीक्षण किया और मालखाने में अनावश्यक रूप से पड़े सामान के निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। डीजीपी ने वारंट रजिस्टर का अवलोकन कर समन तथा वारंटों की तामीली की समीक्षा की एवं तामीली में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने औबेदुल्लागंज और बिलखिरिया थाने के विभिन्न ग्रामों की विलेज क्राइम नोटबुक का अवलोकन किया तथा ग्रामीण अंचलों की आपराधिक स्थिति की जानकारी प्राप्त की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए।

डीजीपी ने आईसीजेएस की समीक्षा की

डीजीपी ने रात एक बजे औबेदुल्लागंज थाने का निरीक्षण किया। उन्होंने औबेदुल्लागंज थाने में समन वारंट की तामीली की समीक्षा की और वारंट रजिस्टर के उचित संधारण के निर्देश दिए। इस संबंध में थाने की कार्यप्रणाली पर अप्रसन्नता व्यक्त की। यहां डीजीपी श्री सक्सेना ने स्वयं कम्प्यूटर का संचालन कर आईसीजेएस की समीक्षा की। यहां उन्होंने मालखाने का भी अवलोकन किया। उन्होंने थानों की केस डायरी की समीक्षा की एवं एसडीओपी द्वारा विवेचना किए जा रहे प्रकरणों की समीक्षा कर सुधार के निर्देश दिए।

अपराधों के निराकरण के लिए नवीन तकनीकों का प्रयोग करें

बिलखिरिया में जब्त वाहनों के निपटान के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्हाेंने थाना भवन के जीर्णोद्धार कार्य की प्रशंसा की। सीसीटीएनएस पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर उन्होंने अपराधों के निराकरण के लिए नवीन तकनीकों का अधिक से अधिक प्रयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने सीसीटीवी सर्विलांस कैमरों के परिचालन तथा पेंडिंग अपराधों की भी समीक्षा की। डीजीपी ने बिलखिरिया थाना क्षेत्र में बीट प्रणाली की समीक्षा की तथा पूर्व में पुलिस मुख्यालय द्वारा आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक को बीट प्रभारी बनाने के निर्देशों की तामीली की जानकारी प्राप्त की एवं बीट सिस्टम को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

सुबह चार बजे भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों की ली बैठक

डीजीपी श्री सक्सेना प्रात: चार बजे भोपाल के टीटी नगर थाने के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे। इस दौरान डीजीपी श्री सक्सेना ने भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों की बैठक ली और कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने पुलिस की बल की कमी की समीक्षा की और उपलब्ध बल के प्रभावी उपयोग के संबंध में निर्देश दिए। हाल ही में मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रमाेशन के संबंध में दिए गए निर्देशों के पालन के लिए डीजीपी ने पुलिस कमिश्नर, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर, डिप्टी पुलिस कमिश्नर से कहा कि शीघ्र प्रमोशन संबंधी कार्यवाही की जाए ताकि इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर/कर्मचारियों की पूर्ति हो सके। इस दौरान कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्तों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की।

वरिष्ठ अधिकारियों ने भी किया निरीक्षण

डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना द्वारा प्रदेश के सभी आईजी/डीआईजी/एसपी एवं भोपाल तथा इंदौर के पुलिस आयुक्त/उपायुक्त को रात को भी अपने-अपने क्षेत्र के थानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए, जिसमें आईजी/डीआईजी को उनके मुख्यालय के बाहर के जिलों के थानों तथा एसपी को जिला मुख्यालय के बाहर के थानों के निरीक्षण के लिए निर्देशित किया गया। निरीक्षण के दौरान अपराधों की समीक्षा, थानों का रिकॉर्ड का संधारण तथा समन वारंट तामीली की समीक्षा की गई। निर्देशों के पालन में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात प्रदेश के सभी जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सवा सौ से अधिक थानों का औचक निरीक्षण किया तथा निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पुलिस को डिजीटल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं इंटर आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का उपयोग करते हुए अपराधों की रोकथाम करने के लिए प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। मध्य प्रदेश पुलिस को आईसीजेएस (इन्टर-आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) के क्रियान्वयन में सराहनीय कार्य के लिए देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ट्रॉफी प्रदान की गई। इसके साथ ही प्रदेश की फॉरेंसिक शाखा को देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है।

 

नई दिल्ली में 21-22 दिसंबर 2023 को आयोजित “Conference on Good Practices in CCTNS/ICJS, 2023” में यह पुरस्कार दिया गया। मुख्य अतिथि इंटेलिजेंस ब्यूरो के वर्तमान निदेशक श्री तपन कुमार डेका, श्री विवेक गोगिया (महानिदेशक, एनसीआरबी) सहित सभी राज्यों के प्रतिभागी उपस्थित थे।

 

डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना ने इस उपलब्धि पर एडीजी (एससीआरबी) श्री चंचल शेखर एवं उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उल्लेखनीय है कि डीजीपी द्वारा आईसीजेएस के अधिक से अधिक कारगर उपयोग के लिए समय-समय पर मैदानी अमले को निर्देशित किया जाता रहा। नियमित समीक्षा भी की जाती रही। डीजीपी श्री सक्सेना ने कहा कि भविष्य में इसी प्रकार से अपराधों की विवेचना एवं पतारसी में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अपराधों की रोकथाम करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएं।

 

शीघ्र एवं पारदर्शी विवेचना के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है आईसीजेएस

 

इन्टर-आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ई-कमेटी की एक पहल है। यह आपराधिक एवं न्यायिक प्रणाली को त्वरित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक ऐसी प्रणाली है, जिस पर पुलिस, जेल, फॉरेंसिक, प्रॉसीक्यूशन एवं न्यायिक विभाग आपस में जुड़े हैं। मुख्यतः आईसीजेएस एक एकीकृत पोर्टल है जो पुलिस, जेल, फॉरेंसिक, प्रॉसीक्यूशन और न्यायिक विभागों को एक संयुक्त स्थानीय न्यायिक प्रणाली में जोड़ता है, जो अपराधों की विवेचना और उनके खिलाफ कार्रवाई में सुधार करने में मदद करता है। इस प्रणाली का उद्देश्य अपराधों की रोकथाम, जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार करना है, ताकि विभिन्न संगठनों और विभागों के बीच सहयोग और कार्यप्रणाली में सुधार हो सके। इसका उद्देश्य अपराधों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई में तेजी, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर न्याय पहुंचाना है।

 

इसकी महत्वपूर्ण विशेषताएं इस प्रकार हैं

 

पैन इंडिया क्रिमिनल रिकॉर्ड सर्च

 

आइडेंटिफिकेशन ऑफ क्रिमिनल नेटवर्क

 

360 डिग्री प्रोफाइलिंग ऑफ सस्पेक्ट

 

नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है एसीआरबी

 

मध्यप्रदेश में आईसीजेएस के क्रियान्वयन में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। एससीआरबी सभी पिलर्स के नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करता है, ताकि आईसीजेएस का सुचारू संचालन किया जा सके एवं शीघ्रता से अपराधों की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। एसआरबी द्वारा सभी पिलर्स की मासिक बैठक लेकर समस्याओं का समाधान करने के साथ ही इनकी रिपोर्ट माननीय उच्च न्यायालय की ई-कमेटी को प्रेषित की जाती है।

 

अपराधों पर नियंत्रण का मापदंड होता है चयन का आधार

 

एनसीआरबी द्वारा पूरे देश में घटित अपराध एवं अपराधियों से संबंधित मामलों की सतत मॉनिटरिंग की जाती है। एनसीआरबी की वार्षिक रिपोर्ट में यह बताया जाता है कि पूरे देश में किस राज्य द्वारा आईसीजेएस के माध्यम से अधिक से अधिक अपराधियों की खोजबीन की गई एवं अन्य पिलर्स के द्वारा समन्वय स्थापित कर अपराधों की रोकथाम में क्या प्रयास किए गए। पुरस्कार देने का मुख्य मापदंड आईसीजेएस के माध्यम से अपराध की रोकथाम करना है। अपराधों के नियंत्रण में आईसीजेएस का उपयोग करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।