Ganjbasoda शिशु के शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए जरूरी है पुंसवन संस्कार

गायत्री प्रज्ञापीठ पर वैदिक विधि विधान से सम्पन्न हुआ पुंसवन संस्कार अभियान

कुसंस्कारों से बचाव के साथ ही अच्छे संस्कारो की हो शिशु में स्थापना

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ विदिशा मध्यप्रदेश रमाकांत उपाध्याय / 9893909059

अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वाधान में गायत्री प्रज्ञापीठ पर मंगलवार को बृहद पुंसवन संस्कार का आयोजन किया गया। 

विदिशा शक्तिपीठ से आई टोली सह जिला समन्वयक श्रीराम कटियार, पुंसवन व गर्भाधान संस्कार जिला प्रभारी श्रीमति सुमन भदौरिया, श्रीमति गीता श्रीवास्तव, श्रीमति वर्णा श्रीवास्तव, श्रीमती सविता श्रीवास्तव, थानसिंह कुशवाह, हरीश विजवे द्वारा वैदिक विधान से गर्भवती महिलाओं के उनके परिजनों के साथ गायत्री यज्ञ के माध्यम से पुंसवन संस्कार सम्पन्न कराए।

 

वैश्य महा सम्मेलन के मंकु अग्रवाल, श्रीमति मंजू ओसवाल, अनिता माहेश्वरी, संगम गोयल और शकुन अग्रवाल के सहयोग से आयोजन हुआ।


गंजबासौदा प्रज्ञापीठ ट्रस्ट के मुख्यट्रस्टी एडवोकेट श्यामसुंदर माथुर, उप मुख्यट्रस्टी जयनारायण अहिरवार, ट्रस्टी श्रीमति लक्ष्मी शर्मा, श्रीमति पूनम तिवारी, गायत्री परिजन श्रीमति मधुलता पांडे, श्रीमति संगीता शर्मा, श्रीमति सपना पांडे, महाराजसिंह दांगी, रघुवीरसिंह राय, एसके सैनी, राकेश पांडे, डॉ चंद्रशेखर शर्मा, रमाकांत उपाध्याय, परिव्राजक वसंत पांडे, राजकुमार साहू, मुकेश पांडे, वासू पांडे सहित कई परिजन मौजूद थे। श्रीमति पूनम तिवारी ने सभी गर्भवती महिलाओं को निशुल्क साहित्य वितरित किया।

क्यों जरूरी है पुंसवन संस्कार

सह जिला समन्वयक श्रीराम कटियार ने बताया कि 16 महत्वपूर्ण संस्कार में पुंसवन का अधिक महत्व है, शिशु के गर्भ में आने के तीन माह बाद यह करना चाहिए। इसके माध्यम से शिशु में गर्भ में ही शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास की कामना की जाती है। यज्ञ के माध्यम से पति-पत्नी ब परिजन भगवान से कामना करते हैं कि शिशु में अच्छे संस्कार आए और कुसंस्कार से दूर रहें।

पुंसवन संस्कार जिला प्रभारी श्रीमति सुमन भदौरिया व वर्णा श्रीवास्तव ने बताया कि पुंसवन संस्कार में एक विशेष प्रकार की औषधी गर्भवती महिला के नासिका छिद्र के माध्यम से उसके अंदर पहुंचाई जाती है। गिलोय बृक्ष के तने की बूंदे भी कीटाणुरहित, रोगनाशक के लिए प्रयोग होती हैं।
इसके बाद गर्भपूजन किया जाता है गर्भ को ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर पूजन होती है। गायत्री मंत्र का रोज जप किया जाए तो उसकी संतान पर भगवान की कृपा होती है बो तेजस्वी होती है। इसके बाद दैवीय शक्ति को गर्भ की रक्षा व गर्भवती को उचित बातावरण दिलाने का आश्वासन दिया जाता है यज्ञ में विशेष आहुतियाँ देकर गर्भवती को खीर प्रदान की जाती है। अंत मे सभी आर्शीवाद देकर संतान के सुखी होने की कामना करते हैं।


मुख्यट्रस्टी श्यामसुंदर माथुर ने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा बिभिन्न संस्कार सम्पन्न कराए जाते हैं बर्तमान परिवेश में भारतीय संस्कृति के लिए संस्कार अवश्य कराना चाहिए।