प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में लागू होगा बाँस मिशन – मुख्यमंत्री

एआईएफ योजना में मध्यप्रदेश देश में अव्वल, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कृषि अधो-संरचना फंड की समीक्षा की

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ विदिशा रमाकांत उपाध्याय/ 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कृषि के क्षेत्र में बाँस मिशन लागू कर खेती को लाभ का धंधा बनाया जायेगा। इसके लिए आवश्यक तैयारी शुरू कर दी जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय से एग्रीकल्चर इन्फ्रा-स्ट्रक्चर फंड की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बाँस मिशन शुरू करें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बाँस मिशन के लिए कार्य-योजना बनाने और इसे लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित कर बाँस लगाने की समझाइश दें। प्रदेश में व्यवस्थित ढंग से बाँस मिशन को आगे बढ़ाया जाए। एक सप्ताह में कार्य-योजना बनाकर टास्क फोर्स का गठन कर लिया जाए।

एआईएफ योजना में 1788 प्रोजेक्ट के साथ प्रदेश प्रथम स्थान पर

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश में क्रियान्वित की जा रही एआईएफ योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। इस योजना में अभी तक 1788 प्रोजेक्ट स्वीकृत कर दिए गए हैं, जो पूरे देश का 45 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योजना के प्रोजेक्ट शीघ्र पूरा कर शुभारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हितग्राही अपने अनुभव साझा करेंगे तो अन्य लोगों को भी इसका फायदा होगा।

पराली न जलाने की दें समझाइश

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने के नुकसानों की समझाइश दी जाए, जिससे किसान पराली न जलाये।

जैविक खेती को विशेषज्ञों के माध्यम से आगे बढ़ाये

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती के विशेषज्ञों के माध्यम से इस दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने इसके लिए भी टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए।

फसलों का विविधीकरण आवश्यक

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने फसलों के विविधीकरण एवं निर्यात के लिए ठोस प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में प्रदेश की देश में प्रतिष्ठा है, जिसे बनाये रखने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाए। देश में विशिष्ट पहचान बनाने के लिए फसलों का विविधीकरण बहुत आवश्यक है।