Chitrakoot हिन्दू एकता महाकुंभ में आरएसएस प्रमुख ने किया घरवापसी का आह्वान

स्वास्तिक न्यूज़ पोर्टल @ चित्रकूट रमाकांत उपाध्याय/ 

चित्रकूट में तुलसीपीठाधीश्वर श्री रामभद्राचार्य जी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय हिन्‍दू एकता महाकुंभ की शुरुआत मंगलवार को 1100 शंखों के नाद से हुई। महाकुंभ में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक  मोहन भागवत ने हिन्‍दू धर्म छोड़ने वालों की घरवापसी का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि भय ज्‍यादा दिन तक बांध नहीं सकता है। अहंकार से एकता टूटती है। हम लोगों को जोड़ने के लिए काम करेंगे। महाकुंभ में शामिल हो रहे लोगों को उन्‍होंने इसका संकल्‍प भी दिलाया।

संकल्‍प लेते हुए आरएसएस प्रमुख के साथ लोगों ने कहा-‘मैं हिन्दू संस्कृति का धर्मयोद्धा मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की संकल्प स्थली पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर को साक्षी मानकर संकल्प लेता हूं कि मैं अपने पवित्र हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिन्दू समाज के संरक्षण संवर्धन और सुरक्षा के लिए आजीवन कार्य करूंगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि किसी भी हिन्दू भाई को हिन्दू धर्म से विमुख नहीं होने दूंगा। जो भाई धर्म छोड़ कर चले गए हैं, उनकी भी घर वापसी के लिए कार्य करूंगा। उन्हें परिवार का हिस्सा बनाऊंगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि हिन्दू बहनों की अस्मिता, सम्मान व शील की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पण करूंगा। जाति, वर्ग, भाषा, पंथ के भेद से ऊपर उठ कर हिन्दू समाज को समरस सशक्त अभेद्य बनाने के लिए पूरी शक्ति से कार्य करूंगा।’

देश भक्ति और ईश्‍वर भक्ति एक ही है।

कार्यक्रम को श्री श्री रविशंकर ने भी सम्‍बोधित किया। उन्‍होंने कहा कि कुछ लोग जुटते हैं तो भय पैदा होता है। जबकि जहां संत और हिन्‍दू इक्‍ट्ठा होते हैं वहां अभय मिलता है। उन्‍होंने कहा कि देश भक्ति और ईश्‍वर भक्ति एक ही है। जो देशभक्‍त नहीं है वो ईश्‍वर भक्‍त भी नहीं हो सकता।

श्री श्री रविशंकर ने हिन्‍दू महाकुंभ के 12 मुद्दों का समर्थन किया। ये मुद्दे हैं-राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक श्रीराम मंदिर, देवस्थानों की परंपरा नष्ट कर रहा सरकारी नियंत्रण, धर्मांतरण की अंतर्राष्ट्रीय साजिश, देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी, सामान नागरिकता का मिले अधिकार, लव जेहाद से युवा पीढ़ी में भटकाव, भारतीय दर्शन आधारित शिक्षा जरूरी, धर्म में व्यसन का त्याग हो अनिवार्य, गौरक्षा के हों ठोस प्रयास, मातृ शक्ति को सशक्त बनाना जरूरी, हिंदू धर्म के बारे में दुष्प्रचार बंद हो और पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगे।


काशी के बाद मथुरा की बारी

हिंदू एकता महाकुंभ में जगदगुरू रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि हमने हिंदुओं के हितों की शुरुआत कर दी है. A से अयोध्या, K से काशी के बाद अब M से मथुरा की बारी है. इस आयोजन में हिंदुओं के साथ हो रहे अन्याय, मठ मंदिर की सुरक्षा, धर्मांतरण पर रोक, जनसंख्या नियंत्रण, राष्ट्रवाद और समान नागरिक संहिता, लव जिहाद, गोरक्षा, सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में जगद्गुरू स्वामी रामभद्राचार्य के साथ गुरु शरणानंद, रवि शंकर दास, चिन्ना महाराज, गुरु शरणानंद, मलूक पीठ के राजेंद्र दास, चिदानंद दास सहित देशभर से आए संत मौजूद रहे।
चाहे पंथ अनेक हो हम हिन्दू एक हो’

मनोज तिवारी भी हुए शामिल

हिंदू एकता महाकुंभ में शिरकत करने के लिए पहुंचे दिल्ली के बीजेपी सांसद और प्रसिद्ध भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने महाकुंभ के मंच को चुनावी मंच बना दिया. बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष तिवारी ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद और पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ में कई भजन गाए. अपने भजनों के माध्यम से उन्होंने विपक्षियों पर भी जमकर हमला बोला.

कार्यक्रम के शुभारंभ में स्वागत भाषण में आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि देश स्वतंत्रता का 75 वां अमृत महोत्सव मना रहा हैं और इस पर्व पर हम सबको एकता का सन्देश देना है. यह संदेश भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट से दिया जा रहा है कि चाहे पंथ अनेक हो हम हिन्दू एक हो. इस धरती से भगवान श्री राम ने संकल्प लिया था कि ,हिन्दू एकता के लिए हिन्दू धर्म की एकता और अखंडता के लिए हमारे साथ साथ मातृशक्ति भी उत्साहित है.

इस देश में अकबर को महान नहीं बनाया जाएगा’
आचार्य रामचंद्र दास ने आगे कहा कि इस देश में अकबर को महान नहीं बनाया जाएगा. यहां राणा प्रताप और शिवाजी महान होंग. हमारे लिए हमारी सीता हमारी आदर्श होंगी. हम लोगों को यह स्कल्प लेना होगा कि हिन्दू एक हैं. हम एक हैं. सरकार दोहरी नीति हमारे साथ नहीं कर सकती है. चित्रकूट में 5 सौ मन्दिर है जहां कोई दीपक जलाने वाला नहीं है. हमारे यहां लव जेहाद चलाया जा रहा है. उन्होने कहा कि जो हिन्दू हित की बात करेगा वही देश में राज करेगा. यह सन्तों का ही प्रताप है कि हम अयोध्या में भगवान रामलला का मंदिर बना रहे हैं हम काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर बना रहे है.


इस बार का आयोजन हम अबोध बालकों ने किया है. हमको कोई ऐसा अनुभव नहीं था. हम कह सकते हैं सभी को कष्ट हुआ होगा किंतु इसके लिए आयोजन समिति की तरफ से क्षमा याचना करते हैं. यह संबोधन आयोजक व जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचन्द्रदास ने अपने सम्बोधन में कही है।
महाकुंभ में 12 विषयों पर होगा मंथन
इस महाकुंभ की पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं. इसमें सिर्फ अयोध्या, काशी और मथुरा के महात्म्य समेत 12 विषयों में सबसे बड़ा विषय हिंदू एकता को रखा गया है. जानकारी के मुताबिक इस मौके पर संतों की तरफ से यह भी प्रस्ताव बनाया जाएगा कि हिंदू वर्ग से जुड़ी सभी जातियों को एक मंच पर लाया जाएगा, जिससे एकता का उद्देश्य पूरा हो सके. यह आयोजन 3 दिवसीय होगा. 14 दिसंबर को भव्य कलश यात्रा के बाद मुख्य आयोजन 15 और 16 दिसंबर को होगा।